JSSC CGL कथित पेपर लीक मामले में आज फिर हुई बहस, अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को

JSSC CGL कथित पेपर लीक मामले में आज फिर हुई बहस, अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को

झारखंड की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसी क्रम में जस्सी सीज़र परीक्षा के कथित पेपर लीक मामले ने राज्यभर में बड़ा विवाद खड़ा कर दिया। अभ्यर्थियों और याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले से ही लीक हो चुका था, जिससे निष्पक्ष प्रतियोगिता की भावना आहत हुई है। इस पूरे मामले में अब झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई चल रही है।

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने इस मामले में दायर याचिका पर लंबी सुनवाई की। याचिका में विशेष रूप से मांग की गई है कि इस पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंपी जाए, ताकि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो सके।

याचिकाकर्ताओं की दलीलें

याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि इस परीक्षा में धांधली के पुख्ता सबूत मौजूद हैं। उनका कहना था कि पेपर लीक होने से न केवल मेहनती परीक्षार्थियों का भविष्य दांव पर लग गया है, बल्कि यह पूरे राज्य की परीक्षा व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि स्थानीय एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप था कि राज्य स्तर पर निष्पक्ष जांच की संभावना कम है, इसलिए मामले को सीबीआई जैसी स्वतंत्र और केंद्रीय एजेंसी को सौंपा जाना चाहिए। अधिवक्ताओं ने कोर्ट से अपील की कि अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करना बेहद जरूरी है, क्योंकि लाखों युवाओं का भविष्य इस परीक्षा से जुड़ा हुआ है।

राज्य और संबंधित पक्षों की दलीलें

वहीं दूसरी ओर, राज्य सरकार और परीक्षा प्राधिकरण के अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि जांच पूरी तरह से कानूनी दायरे में और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। उनका कहना था कि सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि राज्य स्तर पर ही सभी साक्ष्य और अभियुक्तों तक पहुंचा जा सकता है।

सरकार के पक्ष ने यह भी दलील दी कि याचिकाकर्ताओं की मांग से जांच प्रक्रिया और अधिक जटिल हो सकती है, जिससे समय भी ज्यादा लगेगा। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि पहले राज्य की जांच एजेंसियों को अपनी प्रक्रिया पूरी करने का अवसर दिया जाए।

अदालत की टिप्पणी और आदेश

लंबी बहस और दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने फिलहाल कोई अंतिम निर्णय नहीं सुनाया। खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत विचार की आवश्यकता है। इसीलिए अदालत ने अगली सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर 2025 तय की।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने यह आदेश दिया कि जब तक सुनवाई पूरी नहीं हो जाती और अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक जस्सी सीज़र परीक्षा के परिणाम पर लगी रोक (स्टे ऑर्डर) यथावत बनी रहेगी।

इसका सीधा मतलब यह है कि लाखों परीक्षार्थियों को फिलहाल अपने परिणाम का इंतजार करना होगा। अदालत ने साफ कर दिया है कि परीक्षा परिणाम को लेकर कोई भी जल्दबाजी नहीं की जाएगी।

परीक्षार्थियों में बढ़ी बेचैनी

परीक्षा में शामिल हुए उम्मीदवारों के लिए यह मामला बेहद संवेदनशील है। एक ओर वे परिणाम घोषित होने का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अदालत की कार्यवाही और जांच की प्रक्रिया लंबी होती जा रही है।

कई अभ्यर्थियों का कहना है कि वे दिन-रात मेहनत करके परीक्षा में शामिल हुए थे, लेकिन अब पेपर लीक जैसे मामलों की वजह से उनके करियर पर संकट मंडरा रहा है। छात्र संगठनों ने भी पारदर्शी जांच की मांग की है और कहा है कि यदि दोषियों को सख्त सजा नहीं दी गई, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं बार-बार होंगी।

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