🌺 झारखंड की माया सम्मान योजना : छठ पर्व पर महिलाओं को मिलेगा ₹2500 का सम्मान
🔹 प्रस्तावना
झारखंड सरकार ने राज्य की महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के लिए एक नई पहल शुरू की है — “माया सम्मान योजना”। इस योजना के तहत राज्य की महिलाएँ न केवल आत्मनिर्भर बनेंगी, बल्कि उन्हें त्योहारों के अवसर पर आर्थिक सहयोग भी मिलेगा। सरकार ने घोषणा की है कि छठ पर्व के अवसर पर सभी पात्र महिलाओं को ₹2500 की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
🔹 योजना का उद्देश्य
माया सम्मान योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें समाज में एक सम्मानजनक स्थान दिलाना है। झारखंड सरकार चाहती है कि महिलाएँ आर्थिक सहायता के माध्यम से अपने परिवार और समाज में अधिक योगदान दे सकें।
🔹 छठ पर्व पर विशेष लाभ
छठ पर्व झारखंड सहित पूरे पूर्वी भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे महिलाएँ बड़ी श्रद्धा और भक्ति से मनाती हैं। इस पवित्र पर्व पर सरकार ने महिलाओं को ₹2500 की आर्थिक सहायता राशि देने का निर्णय लिया है।
इस राशि का उद्देश्य है —
त्योहार के खर्च में सहयोग देना,
महिलाओं के आर्थिक बोझ को कम करना,
और उन्हें यह महसूस कराना कि सरकार उनके साथ है।
🔹 कौन लाभ ले सकता है?
झारखंड राज्य की सभी पात्र महिलाएँ इस योजना का लाभ उठा सकती हैं।
विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी महिलाएँ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाएँ इसके अंतर्गत आती हैं।
लाभ सीधे महिलाओं के बैंक खातों में जमा किया जाएगा।
🔹 योजना की प्रमुख विशेषताएँ
₹2500 की सहायता राशि छठ पर्व के अवसर पर दी जाएगी।
महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से पैसा मिलेगा।
योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से सक्षम बनाना और उनके त्योहारों में खुशियाँ बढ़ाना है।
इसे झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) और राज्य के महिला एवं बाल विकास विभाग के माध्यम से लागू किया जा रहा है।
🔹 योजना के लाभ
महिलाओं की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
त्योहारों के समय आर्थिक सहायता से राहत मिलेगी।
महिलाओं का सम्मान और आत्मविश्वास बढ़ेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी योजनाओं की पहुँच बढ़ेगी।
🔹 निष्कर्ष
माया सम्मान योजना झारखंड सरकार की एक संवेदनशील और दूरदर्शी पहल है, जो महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ त्योहारों में उनके योगदान को भी सम्मानित करती है।
छठ पर्व पर ₹2500 की राशि देना सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि “नारी शक्ति के प्रति सम्मान” का प्रतीक है।

